शनिवार, 16 फ़रवरी 2013


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यहाँ की पृष्ठभूमि है इमारतें-
घरों के पीछे घर
घरों के ऊपर घर

ये शहर शहर नहीं
है अब आँगन
इन्हीं इमारतों के बीच घिरा

कभी कभी चाँद भी दिख जाता होगा
लोगों को फुर्सत में,
जब एक उजाले के स्त्रोत
को ले कर वो हो जाते होंगे विस्मित
और ताकते होंगे ठीक ऊपर।

मुँह और चाँद आमने-सामने
आज कितने दिनों बाद
इस शहर में

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