चेहरे की किताबों का ये इश्क याद रहे, आबाद रहे
खबर है सबको
हाज़िर नहीं एक साथ हम दोनों
फिर भी कुछ है जो दोनों में चल रहा है (ऐसा कमेंट्स बताते हैं)
वो मेरा तुम्हारी खूबसूरती के बारे में बीस बोलना
वो तुम्हारा उसको कभी स्पैम कर
कभी मैसेज कर कहना "इसे हटा लीजिये, प्लीज़"
एक दिल जीते बादशाह को किसी कनीज़ कर कहना लगता है।
वो कभी कुछ भी लिख कर मेरे लेटेस्ट कमेन्ट को तह कर के छुपा देना
हाज़िर नहीं एक साथ हम दोनों
फिर भी, कोई एक्टिविटी कहीं देखता तो लगता था
तुमने ये "हरकत" साथ रह कर की है।
अब भी जाता हूँ तुम्हारे वाल पर मैं
कोई स्टेटस अपडेट किये महीनों हुए
मगर लगता है एक सदी यहाँ रुकी पड़ी है।
यूँ तो मेरे ज़ेहन में तुम सबस्क्राइब हो
मगर अपनी वाल पर भी कुछ कह दिया करो तो
मेरे अन्दर का रुका वक्त भी चल पड़े
इस उम्र की आवारगी की प्यास बुझे
ताकि चेहरे की किताबों का ये इश्क याद रहे, आबाद रहे.
(हाँ बाबा ! गुलज़ार के इश्कटाइल में )